
नई दिल्ली में उच्चस्तरीय चर्चा का दौर चला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 के दौरान प्रमुख वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के 27 सीईओ के साथ राउंडटेबल बैठक की। लोक कल्याण मार्ग स्थित उनके आवास पर आयोजित इस बैठक में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, राज्य मंत्री सुरेश गोपी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शरीक हुए।
सीईओ ने भारत की आर्थिक प्रगति पर गहरा विश्वास जताया। नीतिगत स्थिरता, सुधारों की रफ्तार और लंबी अवधि की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए उन्होंने निवेश बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने इसे उद्योग-सरकार संवाद का मजबूत मंच बताया, जो नीतियों को परिष्कृत करने और निवेश आकर्षित करने में सहायक सिद्ध होता है।
भारत की तेज आर्थिक गति पर बल देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। वैश्विक ऊर्जा संतुलन में भारत की भूमिका बढ़ेगी। उन्होंने अन्वेषण-उत्पादन में 100 अरब डॉलर और सीबीजी क्षेत्र में 30 अरब डॉलर के निवेश अवसरों का उल्लेख किया।
गैस आधारित अर्थव्यवस्था, रिफाइनरी-पेट्रोकेमिकल एकीकरण, समुद्री क्षेत्र और जहाज निर्माण समेत पूरी वैल्यू चेन में अपार संभावनाएं हैं, मोदी ने रेखांकित किया। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इनोवेशन और साझेदारी पर जोर दिया। भारत ऊर्जा चेन में विश्वसनीय साझीदार बनने को तैयार है।
यह बैठक भारत को ऊर्जा संक्रमण में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सीईओ ने निवेश बढ़ाने का संकल्प दोहराया, जबकि पीएम का संदेश साफ था—भारत ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास का प्रमुख स्तंभ बनेगा।