
केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने वोटर सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत लगभग 18 लाख वोटरों को भेजे गए नोटिसों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। बुधवार को विधानसभा मीडिया रूम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस प्रक्रिया से हो रही व्यापक परेशानी पर चिंता जताई, जिसमें वोटरों को सुनवाई के लिए हाजिर होने का आदेश दिया गया है।
सतीशन ने कहा कि नाम या प्रारंभिक अक्षरों में मामूली अंतर को ‘तार्किक विसंगति’ बताकर लोगों को तंग किया जा रहा है, जो मुख्य रूप से चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर की खामियों का नतीजा है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘सिस्टम की तकनीकी गलतियों की सजा नागरिकों को नहीं मिलनी चाहिए।’ BLO अधिकारियों को घर-घर जाकर सुधार करने के निर्देश देने की वकालत की।
बीएलओ ऐप से जारी नोटिसों को पूरी तरह रद्द करने की मांग करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग के आश्वासनों के जमीनी स्तर पर अपूर्ण क्रियान्वयन पर निशाना साधा। फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिससे वोटर सूची से नाम हटाए जा रहे हैं। गलत जानकारी वाले फॉर्म जमा करने वालों और सत्यापन के बिना स्वीकार करने वाले BLO के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि बिना सूचना के किसी वोटर का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए, खासकर उत्तरी केरल के जिलों में हो रही ऐसी घटनाओं पर। SIR को नागरिकता सत्यापन जैसा बताते हुए राजनीतिक दलों से संयम बरतने को कहा। प्रवासी वोटरों के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जन्मस्थान दर्ज करने का विकल्प न होने पर भी आपत्ति जताई, लाखों प्रभावित लोगों के लिए समय विस्तार की मांग की।
सभी जिला कलेक्टरों को शिकायतें भेजी गई हैं और विपक्ष चुनाव आयोग व दलों के बीच बातचीत कराने की कोशिश करेगा।