
भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता देश को वैश्विक व्यापार मंच पर मजबूत स्थिति प्रदान करेगा। विशेषज्ञों ने बुधवार को इसे अन्य द्विपक्षीय सौदों के लिए रणनीतिक लाभ बताया।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद के पूर्व अध्यक्ष महावीर प्रताप ने कहा कि यह समझौता अमेरिकी व्यापार नीतियों के दबाव के बीच आया है। यूरोप, अमेरिका के बाद सबसे बड़ा विकसित बाजार है। चमड़ा, वस्त्र और अन्य श्रम-गहन क्षेत्रों पर शून्य आयात शुल्क से निर्यात बढ़ेगा और रोजगार सृजन होगा।
इंडियन कॉफी रोस्टर्स एसोसिएशन के श्रीकांत राव ने इसे बड़ा कदम बताया। यूरोप भारतीय कॉफी का प्रमुख बाजार है। इससे निर्यात को गति मिलेगी और व्यवसायी मशीनरी तथा मूल्यवर्धित उत्पादों में दीर्घकालिक निवेश कर सकेंगे।
तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के के.एम. सुब्रमणियन ने 20 वर्षों की मेहनत का फल बताया। तिरुपुर से 45,000 करोड़ रुपये के परिधान निर्यात होते हैं, जिसमें 27 यूरोपीय देशों का 20 प्रतिशत हिस्सा है। लागू होने पर पहले वर्ष 15 प्रतिशत वृद्धि संभव है।
विश्व जीडीपी का 25 प्रतिशत और 2 अरब लोगों को प्रभावित करने वाला यह समझौता भारत की व्यापारिक क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह न केवल निर्यात बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच मजबूत आधार भी प्रदान करेगा।