
नई दिल्ली। भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेवीसिएने ने यूरोपीय संघ और भारत के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताते हुए इसे सभी समझौतों की जननी करार दिया। विशेष साक्षात्कार में उन्होंने इसके विशाल पैमाने, व्यापक दायरे और भू-राजनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
यह सामान्य व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि दुनिया के दो सबसे बड़े व्यापारिक समूहों और दो मजबूत लोकतंत्रों के बीच का ऐतिहासिक समझौता है। वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में यह लोकतांत्रिक देशों के लिए व्यापार संबंध मजबूत करने का आदर्श मॉडल प्रस्तुत करता है।
राजदूत ने दोनों पक्षों के कारोबारियों के लिए खुलने वाली अपार संभावनाओं को सबसे बड़ा अवसर बताया। भारत पहले से ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, और यह समझौता उसकी भूमिका को और सशक्त बनाएगा। यूरोपीय संघ वैश्विक व्यापार का प्रमुख स्तंभ है, इसलिए दोनों के आर्थिक संबंधों का गहराना रणनीतिक रूप से जरूरी है।
भारत ने व्यापारिक जुड़ाव में लंबा सफर तय किया है, और भविष्य में ईयू-भारत संबंधों की संभावनाएं उज्ज्वल हैं। लिथुआनिया जैसे छोटे देश के लिए ईयू के साझा बाजार ने पिछले दो दशकों में जबरदस्त वृद्धि दी, अब भारत के साथ साझेदारी इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
दोनों देशों के बीच वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार करीब 400 मिलियन यूरो का है, जो क्षमता से बहुत कम है। एफटीए से कई क्षेत्रों में व्यापार बढ़ेगा। लिथुआनिया सरकार व्यापारियों को कम शुल्क, आसान प्रक्रियाओं और बेहतर बाजार पहुंच की जानकारी देगी।
लिथुआनिया की प्रति व्यक्ति आय 29,000-30,000 यूरो है, जहां उपभोक्ता भारतीय उत्पादों की बाट जोह रहे हैं। अमेरिकी टैरिफ नीतियों और वैश्विक तनावों के बीच यह एफटीए विश्वसनीय विकल्प है। राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत होने से चुनौतियां कम होंगी, और सीमा शुल्क तथा संस्थागत सहयोग बढ़ेगा।