
सबरीमाला मंदिर के सोना चोरी कांड में इसरो के वैज्ञानिकों की नई जांच ने कई संदेहों को दूर कर दिया है। गर्भगृह के दरवाजों के पैनल नहीं बदले गए थे, बल्कि तांबे की चादरों से सोने की पतली परत को रसायनों से उतार लिया गया था। यह निष्कर्ष विशेष जांच दल को सौंपे गए और केरल हाईकोर्ट में पेश किए गए।
इससे यह अफवाहें खत्म हो गईं कि पूरा ढांचा बदल दिया गया या अंतरराष्ट्रीय गिरोहों ने इसे हथिया लिया। विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के विशेषज्ञों ने पाया कि तांबे की चादरें और ‘कट्टिल’ लकड़ी का ढांचा बिल्कुल असली हैं। चोरी का सोना ठोस नहीं, बल्कि चढ़ाई गई परत थी।
दोबारा लगाई गई चादरों में सोने की कमी साफ दिखी, जो बिना तांबे को नुकसान पहुंचाए अलग किया गया। पैनलों पर दिखे बदलाव रासायनिक प्रतिक्रियाओं का नतीजा हैं, जैसे पारा और घोलों से सतह का रंग-बनावट बदलना। पैनल बदलने का कोई सबूत नहीं।
एसआईटी पुराने दरवाजे के नमूनों की तुलना कर रही है। जल्द ही पूरी रिपोर्ट आएगी। अब जांच सोना उतारने की विधि और अपराधियों पर केंद्रित होगी, जो मामले को नई दिशा देगी।