
नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संयुक्त सदनों को संबोधन से हुई। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने इस भाषण की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे व्यापक, दूरदर्शी तथा विजनरी करार दिया।
उनके आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट में कहा गया कि राष्ट्रपति का अभिभाषण भारत की शानदार प्रगति की कहानी बयां करता है। साथ ही भविष्य के लिए आत्मविश्वासपूर्ण दिशा-निर्देश 제시 करता है।
भाषण में राष्ट्रीय विकास के हर आयाम को समेटा गया है, जो समावेशी और जनोन्मुखी विकास की दृढ़ संकल्प को प्रतिबिंबित करता है। यह समाज के हर तबके तक पहुंचने वाली हमारी सामूहिक महत्वाकांक्षा को दर्शाता है- एक मजबूत, आत्मनिर्भर विकसित भारत का निर्माण।
राष्ट्रपति ने 21वीं सदी के प्रथम 25 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। पिछले दशक में इंफ्रास्ट्रक्चर, रेल, रक्षा, अंतरिक्ष, स्टार्टअप तथा सामाजिक कल्याण में उल्लेखनीय सफलताएं मिलीं। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से विश्व ने भारत के पराक्रम का प्रमाण देखा।
बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों का उल्लेख कर कहा कि सरकार दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और सभी के लिए संवेदनशील है। ‘सबका साथ, सबका विकास’ हर नागरिक तक पहुंच रहा। 25 करोड़ लोग गरीबी मुक्त हुए। महिलाओं के सशक्तिकरण में 10 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूहों में भागीदारी और लखपति दीदियों की बढ़ती संख्या उल्लेखनीय।
बजट सत्र 2 अप्रैल 2026 तक चलेगा। आर्थिक सर्वेक्षण 29 जनवरी को और केंद्रीय बजट 1 फरवरी को प्रस्तुत होगा।