
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता देश की प्रमुख उद्योगों के लिए नया दौर लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्सटाइल, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और आभूषण क्षेत्रों को इससे अपार लाभ होगा। यह सौदा भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में मजबूत पैठ दिलाने के साथ भारत को विश्वसनीय आपूर्ति केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।
दोधिया सिंथेटिक्स के भद्रेश दोधिया ने बताया कि ईयू प्रतिवर्ष 250 अरब डॉलर का टेक्सटाइल आयात करता है, जिसमें भारत का हिस्सा 10 प्रतिशत से कम है। पड़ोसी देशों को पहले से ड्यूटी-मुक्त पहुंच मिलने से उनका निर्यात 30-40 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत स्थिर साझेदार के रूप में उभर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वाणिज्य मंत्रालय के प्रयासों से टेक्सटाइल उद्योग को बल मिला है, लेकिन यूरोपीय मानकों पर खरा उतरना जरूरी है। दोधिया की कंपनी प्लास्टिक रीसाइक्लिंग और कच्चे माल पर केंद्रित है, जहां यूरोप वर्तमान में 20 प्रतिशत निर्यात लेता है। एफटीए से उत्पादन उन्नयन और सर्कुलर इकोनॉमी में प्रगति संभव है।
आत्मनिर्भर भारत से एमएसएमई को मजबूती मिलेगी। भारत की स्थिरता, लोकतंत्र, युवा शक्ति और बड़ा बाजार निवेश को लुभाते हैं। ईयू के लिए स्थिरता अनिवार्य है, और यह समझौता भारत की हरित दृष्टि को बढ़ावा देगा।
आभूषण क्षेत्र में एसीपीएल एक्सपोर्ट्स के रोहित गुप्ता ने इसे मील का पत्थर बताया। श्रम-गहन हैंडमेड ज्वेलरी को रोजगार के नए रास्ते मिलेंगे। जयपुर जैसे केंद्र यूरोप के 27 देशों के लिए हब बन सकते हैं, जहां सस्ती श्रमिक शक्ति, रचनात्मकता और कुशलता से उच्च बाजारों पर कब्जा जमेगा।