
भारत की औद्योगिक गतिविधियां दिसंबर में चरम पर पहुंच गईं। इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (आईआईपी) में 7.8 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो पिछले दो साल से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर है।
सांख्यिकी मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र ने 8.1 प्रतिशत की उछाल के साथ नेतृत्व किया। खनन में 6.8 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
उद्योग समूहों में कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद 34.9 प्रतिशत, मोटर वाहन 33.5 प्रतिशत और बेसिक मेटल्स 12.7 प्रतिशत बढ़े। दवा क्षेत्र में 10.2 प्रतिशत की प्रगति वैक्सीन व विटामिन की मांग से आई।
उपयोग आधारित वर्गीकरण में इंफ्रास्ट्रक्चर गुड्स 12.1 प्रतिशत, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं 12.3 प्रतिशत चढ़ीं। कैपिटल गुड्स 8.1 प्रतिशत और इंटरमीडिएट 7.5 प्रतिशत बढ़े।
अप्रैल-दिसंबर 2025-26 में कुल आईआईपी 3.9 प्रतिशत ऊपर रहा। विशेषज्ञ रजनी सिन्हा का मानना है कि सरकारी खर्च, जीएसटी सुधार और आरबीआई कदमों से यह गति बनी रहेगी। आगामी बजट औद्योगिक भविष्य तय करेगा।
यह आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण हैं, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद।