
केरल की प्रसिद्ध आर्य वैद्यशाला चैरिटेबल अस्पताल के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिरकत की। उन्होंने संस्था के संस्थापक वैद्यरत्नम पी.एस. वरियर को नमन करते हुए कहा कि आयुर्वेद संरक्षण और प्रचार में इसकी भूमिका अतुलनीय है। वरियर का लोक कल्याण के प्रति समर्पण आज भी मार्गदर्शक बना हुआ है।
पीएम ने कहा, आर्य वैद्यशाला भारत की चिकित्सा परंपरा का जीता-जागता प्रतीक है। आयुर्वेद काल या क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन संतुलन और प्रकृति संयोग का पाठ पढ़ाता रहा। वर्तमान में संस्था 600 से ज्यादा आयुर्वेदिक दवाएं बनाती है। इसके अस्पताल देशभर में फैले हैं, जहां 60 से अधिक देशों के रोगी इलाज कराते हैं।
संस्था ने सेवा से विश्वास अर्जित किया है। कष्ट की घड़ी में यह उम्मीद का केंद्र बनती है। चैरिटेबल अस्पताल 100 वर्षों से सेवारत है, जिसमें वैद्यों, चिकित्सकों, नर्सों का योगदान सराहनीय है।
सरकारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए मोदी ने बताया कि पहले पारंपरिक चिकित्सा को उपेक्षित रखा गया। अब आयुष मंत्रालय के तहत आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी आदि एकीकृत हैं। नेशनल आयुष मिशन से 12 हजार वेलनेस सेंटर शुरू हुए। आयुष विनिर्माण बढ़ा, निर्यात 2014 के 3 हजार करोड़ से पहुंचा 6500 करोड़ तक। इससे किसानों को लाभ मिला।
आयुर्वेद की प्रमाणिक शोध की कमी को दुर्भाग्य बताया। आधुनिक तकनीक, एआई से भविष्योन्मुखीकरण जरूरी। मोदी ने आह्वान किया कि वैज्ञानिक आधार पर आयुर्वेद को मजबूत बनाएं, ताकि वैश्विक पटल पर चमके।