
दुनिया भर में भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से मजबूत हो रही है। आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने अपने सातवें ‘वार्षिक चिंतन’ नोट में इसे एक असाधारण उपलब्धि बताया है।
बिड़ला के अनुसार, वैश्विक माहौल अब स्थिर नियमों पर नहीं, बल्कि लगातार बातचीत और समझौतों पर चल रहा है। ऊर्जा में आज का साथी कल तकनीक में प्रतिद्वंद्वी बन सकता है, जिससे निर्णय लेना जटिल हो गया है।
ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था अडिग बनी हुई है। इसकी मजबूती विशाल आबादी, बुनियादी ढांचे का तेज विस्तार, अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण और जन-व्यवसायों की उभरती महत्वाकांक्षाओं से आ रही है।
“बड़े सौदों वाली दुनिया में भारत आकार, विश्वसनीयता और निरंतरता का प्रतीक है,” उन्होंने कहा। भारत न केवल लाभ ले रहा है, बल्कि सक्रिय योगदान भी दे रहा है।
आदित्य बिड़ला समूह की प्रगति भी इसी सोच पर आधारित है। समूह राष्ट्र के साथ कदम मिलाकर बढ़ा है। पिछले दशक में एमएसएमई ऋणों में राष्ट्रीय स्तर पर तीन गुना वृद्धि हुई, वहीं समूह की एनबीएफसी लोन बुक 17,000 करोड़ से बढ़कर 1.5 लाख करोड़ रुपये हो गई।
यह नोट बिड़ला का व्यक्तिगत चिंतन है, जो वैश्विक बदलावों, भारत के उत्थान और व्यवसायिक अनुभवों का मूल्यांकन करता है। यह भारत को वैश्विक अस्थिरता में स्थिरता का मॉडल दिखाता है।