
भारत के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है, जिन्होंने सेना, खेल और राजनीति तीनों क्षेत्रों में अविस्मरणीय सफलताएं हासिल कीं। 29 जनवरी 1970 को राजस्थान के जैसलमेर में जन्मे राठौड़ ने जीवन के हर मोड़ पर उत्कृष्टता का परिचय दिया।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 77वें कोर्स से पास होने के बाद भारतीय सैन्य अकादमी में उन्होंने सर्वश्रेष्ठ कैडेट के रूप में स्वॉर्ड ऑफ ऑनर प्राप्त किया। 1990 में 64वीं कैवलरी में कमीशन, फिर 9 ग्रेनेडियर्स में स्थानांतरण। कारगिल युद्ध में वीरता दिखाई। लेफ्टिनेंट से कर्नल तक की यात्रा में हर कदम पर देश की सेवा की।
सेना की वर्दी में ही निशानेबाजी का जुनून पनपा। 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में डबल ट्रैप गोल्ड और 192 का रिकॉर्ड। 2006 मेलबर्न में दोहराया। विश्व चैंपियनशिप में सिडनी 2004 व काहिरा 2006 गोल्ड। विश्व कप में दो गोल्ड, एशियाई चैंपियनशिप में पांच गोल्ड, एशियाड ब्रॉन्ज—कुल 13 पदक। 2002-06 में 25 अंतरराष्ट्रीय पदक।
2004 एथेंस ओलंपिक में डबल ट्रैप रजत—निशानेबाजी में भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक। 2003 सिडनी सिल्वर ने 40 साल का सूखा खत्म किया। 2006 स्पेन ब्रॉन्ज, 2011 कुआलालंपुर में 194 का विश्व रिकॉर्ड बराबर।
2013 में सेना व निशानेबाजी से संन्यास के बाद राजनीति में प्रवेश। 2014-23 तक लोकसभा सांसद, खेल व सूचना मंत्री। 2023 से राजस्थान कैबिनेट मंत्री।
पुरस्कार: 2004 अर्जुन, 2005 पद्मश्री व खेल रत्न। राठौड़ की कहानी प्रेरणा का स्रोत है।