
बजट सत्र के पहले दिन संसद में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के दौरान विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। ‘जी राम जी’ योजना की सराहना करते ही विपक्षी सांसदों ने नारे लगाते हुए इस योजना को वापस लेने की मांग की। विकसित भारत-ग्राम कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करने वाली इस योजना पर भाजपा और एनडीए सदस्यों ने तालियां बजाईं, लेकिन विपक्ष ने विरोध जताया।
हंगामे के कारण राष्ट्रपति को अपना भाषण बीच में रोकना पड़ा। बाद में उन्होंने कहा कि यह सुधार भ्रष्टाचार रोकने और गांवों को नई ऊर्जा देने का माध्यम बनेगा। किसानों, पशुपालकों और मछुआरों को विशेष सुविधाएं मिलेंगी। सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय जैसे संस्थान ज्ञान प्रदान कर रहे हैं। 10 हजार से अधिक एफपीओ के जरिए कृषि क्षेत्र को बल मिल रहा है।
महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ‘महिला और विकास’ के मंत्र से देश आगे बढ़ रहा है। आवास योजना से जल जीवन मिशन तक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। दो करोड़ से ज्यादा लखपति दीदियां बन चुकी हैं, तीन करोड़ का लक्ष्य शीघ्र हासिल होगा।
यह घटना संसदीय सत्र के लिए विवादास्पद शुरुआत का संकेत देती है, जहां नीतिगत मुद्दों पर राजनीतिक टकराव तेज हो सकता है।