
आजकल थोड़ी सी तकलीफ होने पर मौसम को कोसा जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि शरीर के भीतर की गड़बड़ी ही असली वजह होती है, जो बाहर के प्रभाव से बीमारी को जन्म देती है। तत्काल दवाओं से लक्षण दब जाते हैं, मगर मूल कारण पर ध्यान कम ही दिया जाता है। सभी रोगों की जड़ एक ही है – गलत जीवनशैली।
यह खराब आदतें शरीर को कमजोर बनाती हैं और रोगों का अड्डा तैयार कर देती हैं। कई बार बीमारी अंदर ही पनपती रहती है, लक्षण देर से नजर आते हैं। अष्टांग हृदयम ग्रंथ दिनचर्या के सिद्धांत सिखाता है, जो बिना दवा के स्वास्थ्य सुनिश्चित करता है। आइए जानें कैसे शुरू करें दिन।
सूर्योदय से पूर्व उठना स्वस्थ जीवन का पहला मंत्र है। जागते ही गुनगुना पानी पिएं, रात्रि के विषाक्त पदार्थ बाहर निकालें। यह पाचन अग्नि प्रज्वलित करता है, हार्मोन संतुलित रखता है और सच्ची भूख जगाता है।
भोजन पूर्व मुख शुद्धि अनिवार्य। जिह्वा पर जमी मैल पेट के रोगों को न्योता देती है। तेल चाटना (ऑयल पुलिंग) दांत मजबूत करता है, पीलापन दूर भगाता है।
हल्का व्यायाम ऊर्जा का संचार करता है, रक्त-प्राण समुचित वितरण सुनिश्चित करता है। प्यास लगे तो पानी पीएं, भोजन औषधि समान ग्रहण करें।
इन नियमों से जीवनशैली बदलाव लाएं, रोग स्वतः दूर हो जाएंगे। शुद्ध दिनचर्या ही सच्ची औषधि है।