
वॉशिंगटन। अमेरिकी सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के चेयरमैन मार्क वार्नर ने बांग्लादेश के आगामी आम चुनावों को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अमेरिका की घटती भागीदारी से लोकतांत्रिक समर्थन कमजोर पड़ रहा है, जिससे देश में राजनीतिक अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है। यह स्थिति भारत की क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन रही है।
12 फरवरी को होने वाले चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहीं, इस पर वार्नर ने कहा कि उन्हें कोई पक्की जानकारी नहीं है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन द्वारा विकासशील देशों को दी जाने वाली आर्थिक और मानवीय सहायता रोकने का जिक्र किया, जिससे अमेरिका का सॉफ्ट पावर खत्म हो गया है। पहले के मजबूत रिश्ते अब ढीले पड़ चुके हैं।
मोहम्मद यूनुस के अंतरिम नेता के रूप में उभरने से सबको बदलाव की आस बंधी थी, लेकिन वह उम्मीद टूट चुकी है। युवाओं के लिए शासन चलाना कठिन हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री के भारत में शरण लेने से क्षेत्रीय तनाव बढ़ा है, हालांकि वार्नर को स्वतंत्र चुनाव की उम्मीद है।
बांग्लादेश गरीबी, आर्थिक दबाव और पर्यावरणीय संकटों से जूझ रहा है। उग्रवाद पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि कट्टर इस्लामी विचारधारा का प्रसार सीमित है और अलग-थलग घटनाओं से देश की दिशा नहीं तय होनी चाहिए।
भारत खतरनाक पड़ोस में है, जहां बांग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान चुनौतियां पेश कर रहे हैं। अमेरिका की ताकत केवल सेना या व्यापार से नहीं, बल्कि विकास और लोकतंत्र निर्माण से आई है। सहायता कटौती से बांग्लादेश जैसे देशों में प्रभाव कम हुआ।
संवेदनशील राजनीतिक बदलावों के दौरान लगातार जुड़ाव जरूरी है। दक्षिण एशिया में भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच बांग्लादेश के चुनाव महत्वपूर्ण हैं। भारत के लिए लंबी सीमा, व्यापार और पूर्वी क्षेत्रों में प्रवास से जुड़ी चिंताएं अहम हैं। स्थिर बांग्लादेश ही क्षेत्रीय शांति सुनिश्चित करेगा।