
अगरतला। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) की कोकबोरोक भाषा के लिए रोमन लिपि अपनाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। राज्य के 19 आदिवासी समुदायों में से नौ की मातृभाषा कोकबोरोक को रोमन में लिखने का प्रस्ताव भाजपा सरकार ने अस्वीकार कर दिया।
दक्षिण त्रिपुरा के जोलाईबाड़ी में आदिवासी सभा को संबोधित करते हुए साहा ने कहा कि विदेशी लिपि कोकबोरोक के लिए कभी स्वीकार नहीं होगी। उन्होंने आदिवासी बुद्धिजीवियों से स्वदेशी लिपि पर सहमति बनाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि रोमन लिपि से युवा पीढ़ी अपनी परंपराओं और संस्कृति से कट जाएगी। चकमा समुदाय द्वारा अपनी लिपि विकसित करने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कोकबोरोक बोलने वालों को प्रेरित किया।
टीटीएएडीसी चुनावों से पहले यह फैसला महत्वपूर्ण है। साहा ने कहा कि रोमन मांग युवाओं को भटकाने का प्रयास है। भाजपा सरकार ने आदिवासियों के आर्थिक उत्थान, संस्कृति संरक्षण और माणिक्य राजवंश को सम्मान देने जैसे कदम उठाए हैं।
पार्टी का आदिवासी क्षेत्रों में विस्तार प्रदर्शन पर आधारित है, न कि दबाव पर। टीएमपी रोमन लिपि के लिए आंदोलन जारी रखे हुए है, जो तिब्बती-बर्मी भाषा परिवार से जुड़ी है।