
लखनऊ में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया में कासगंज, बहराइच, फर्रुखाबाद और बस्ती जिलों में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया गया है। अखिलेश यादव के निर्देश पर दाखिल इस शिकायत में सपा ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि प्रक्रिया में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है, जिससे पार्टी समर्थक मतदाता सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
कासगंज विधानसभा के बूथ नंबर 1 से 200 तक, जहां सपा का मजबूत आधार है, वहां बीएलओ द्वारा नोटिस धारकों को महज 12 घंटे का समय दिया जा रहा है। वहीं भाजपा समर्थित बूथों पर पर्याप्त अवसर प्रदान किया जा रहा। बीएलओ पर नए वोटर फॉर्म कम उपलब्ध कराने और घर-घर जाकर सत्यापन न करने के आरोप हैं। सपा ने कुछ अधिकारियों को भाजपा के एजेंट बताते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी की मांग की है। वर्तमान विधायक के पुत्र द्वारा सपा वोटरों को कटवाने का भी दावा किया गया।
बहराइच के नानपारा क्षेत्र में नेपाल मूल की महिलाओं को निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड आदि होने पर भी मैरिज और माइग्रेशन प्रमाण पत्र के अभाव में नाम कटवाए जा रहे हैं। इससे हजारों महिलाएं वोटर सूची से बाहर हो सकती हैं। सपा ने इनकी समस्या का त्वरित समाधान कर सूची में शामिल करने की अपील की।
फर्रुखाबाद के बूथ 128 पर पुरानी सूचियों का गलत संयोजन हुआ, जिसमें मनिहारी के 300 मतदाताओं को विलोपन सूची में डाला गया। सपा ने जांच कर इसे रद्द करने की मांग उठाई।
बस्ती में 1 लाख से अधिक मतदाताओं को नो-मैपिंग त्रुटियों पर कम समय में बुलाया जा रहा, जिससे वे हाजिर नहीं हो पा रहे। सपा ने बूथवार नोटिस सूची पार्टियों को उपलब्ध कराने की मांग की।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की चुनावी तैयारी पर सवाल खड़े करता है, जहां निष्पक्षता सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।