
उत्तराखंड के पवित्र चारधाम तीर्थों- गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ- में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगी रोक ने देशव्यापी बहस छेड़ दी है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इस कदम का खुलकर समर्थन किया है और मांग की है कि देश के हर हिंदू तीर्थ पर ऐसा ही प्रतिबंध लगे ताकि धार्मिक शुद्धता बनी रहे।
वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने बयान जारी कर कहा कि यह फैसला परंपराओं की रक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा, ‘गंगोत्री, केदारनाथ व बद्रीनाथ में गैर-हिंदुओं पर नियंत्रण का वीएचपी स्वागत करता है। इसे सभी हिंदू तीर्थों तक बढ़ाना चाहिए।’ अयोध्या में हाल की एक घटना का हवाला देते हुए उन्होंने पवित्रता भंग के प्रयास को अपराध बताया।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के विरोध पर डॉ. जैन ने कड़ा प्रहार किया। ‘वह सद्भाव की बातें करते हैं लेकिन नफरत फैलाते हैं। सच्चा सद्भाव तब बने जब मक्का में हनुमान चालीसा पढ़ने का साहस दिखाएं। अयोध्या हमारी मक्का समान है। मक्का में गैर-मुस्लिम प्रतिबंधित हैं तो हमारे तीर्थ क्यों खुले?’
डॉ. जैन ने जमीयत को खिलाफत आंदोलन का वारिस और देवबंद को कट्टरवाद का केंद्र बताया। मंदिरों पर हमले, शोभायात्राओं पर पथराव, महिलाओं पर अत्याचार के उदाहरण देकर कहा कि जिहादी हिंसा आम है लेकिन मॉब लिंचिंग हिंदुओं का स्वभाव नहीं। पिछले साल 187 हिंदुओं की हत्या की घटनाओं का जिक्र किया, जिसमें बाड़मेर के खेताराम भील, भीलवाड़ा के सीताराम, बरेली के तेजाराम व गुजरात के जयंती भाटी शामिल हैं। जल्द ही पूरी सूची जारी होगी।
उन्होंने वैश्विक जिहादी उन्माद का उल्लेख किया, जहां अमेरिका-ब्रिटेन में भी भयानक नारे लगते हैं। जमीयत पर आतंकी मामलों में वकालत का आरोप लगाते हुए कहा, ‘भारत हिंदू राष्ट्र है इसलिए सभी धर्मों के लोग रहते हैं। मुस्लिम देशों में भी इतना सौहार्द नहीं। हमारी भावनाओं का सम्मान करें।’