
अयोध्या से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहां जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए इस्तीफा दे दिया। लेकिन उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच चल रही है, जिसे समाजवादी पार्टी के नेता रविदास मेहरोत्रा ने महज नाटक करार दिया है।
लखनऊ में आईएएनएस को दिए बयान में मेहरोत्रा ने कहा कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर सरकारी अत्याचार के खिलाफ बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया था। वहीं, जांच के घेरे में चल रहे इस अधिकारी ने अचानक सरकार के पक्ष में स्टंट किया। यह जनता को भ्रमित करने की चाल है। शंकराचार्य हिंदू समाज के केंद्र हैं, 10 दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं, उन पर अपशब्द और बुरा सलूक हो रहा है—ऐसे में इस इस्तीफे का क्या तुक?
मेहरोत्रा ने भाजपा सरकार पर मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। महंगाई, बेरोजगारी, अपराध, स्वास्थ्य व शिक्षा व्यवस्था की बदहाली पर चर्चा से बच रही सरकार यूजीसी के नए नियमों के बहाने शिक्षा पर कब्जा जमाना चाहती है। यह छात्रों-शिक्षकों की आवाज दबाने का हथकंडा है, सुधार का नहीं।
सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा कर्मचारी अनुशासन के दायरे में है और संविधान-लोकतंत्र के समर्थन में। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह घटना भ्रष्टाचार, वफादारी और जवाबदेही के सवाल खड़े कर रही है। क्या यह सच्ची निष्ठा है या जांच से बचाव? जनता देख रही है।