
भारतीय सेना के इतिहास में जनरल केएम करियप्पा का नाम साहस और दूरदृष्टि का प्रतीक है। 1899 में कूर्ग की वादियों में जन्मे करियप्पा ने ब्रिटिश काल में नस्लीय भेदभाव तोड़कर पहला भारतीय कमांडर-इन-चीफ बना। लेकिन 1947-48 के भारत-पाक युद्ध में उनका सबसे बड़ा योगदान जोजिला दर्रे पर आया।
विभाजन के बाद पाक प्रायोजित कबायलियों ने जोजिला पर कब्जा कर लिया, जो कश्मीर से लद्दाख की एकमात्र सड़क थी। 11,500 फुट ऊंचाई पर बर्फीले तूफान और ऑक्सीजन की कमी ने इसे अजेय बना दिया। पैदल हमले नाकाम हो चुके थे।
करियप्पा ने उच्चाधिकारियों के आदेशों को नजरअंदाज कर टैंकों का इस्तेमाल किया। ऑपरेशन बाइसन में 77वीं पैरा ब्रिगेड ने दुश्मन को हैरान कर नौशेरा, झंगर, द्रास, कारगिल पर कब्जा किया। 24 नवंबर को लेह से संपर्क बहाल।
यह न सिर्फ क्षेत्र बचाया, बल्कि ऊंचाई पर युद्ध की नई रणनीति सिखाई। आज भी सैनिकों के लिए प्रेरणा। करियप्पा साबित करते हैं—देश के लिए आदेशों से ऊपर कुछ नहीं। लेह आज भारत का अभिन्न अंग है, उनका साहस ही कारण।