
क्वेटा। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों का अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने मंगलवार को खुलासा किया कि प्रांत में तीन और बलूच नागरिकों को जबरन गायब कर दिया गया है। ये घटनाएं जबरन गायब करने और अतिरिक्त-न्यायिक हत्याओं की बढ़ती संख्या के बीच घटी हैं, जो पूरे इलाके में भय का माहौल पैदा कर रही हैं।
बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग पांक ने इन अपहरणों की कड़ी निंदा की। सुराब जिले के 40 वर्षीय शिक्षक अली अहमद रेकी को 24 जनवरी को क्वेटा के गंज चौक से काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) के एजेंटों ने उठा लिया। उसके बाद से उनका कोई सुराग नहीं है।
उसी दिन और उसी स्थान से सुराब के 25 वर्षीय चिकित्सक शाहजैन अहमद को भी सीटीडी ने अगवा कर लिया। संगठन ने 22 वर्षीय छात्र जुनैद अहमद का मामला भी उजागर किया, जिन्हें 23 जनवरी को क्वेटा के चिल्ड्रन हॉस्पिटल, ख्वारी रोड से उठा लिया गया।
ये घटनाएं बलूच नरसंहार दिवस के अवसर पर सामने आई हैं, जब बलूच स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (आजाद) ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों को पत्र लिखकर बलूचिस्तान में हो रहे अत्याचारों पर ध्यानाकर्षण कराया। इस दिन पाकिस्तान के कथित औपनिवेशिक शासन के तहत दशकों से चली आ रही पीड़ा को याद किया जाता है।
पत्र में विस्तार से कहा गया कि जबरन गायब करना, ‘मारो और फेंको’ की क्रूर प्रथा, हिरासत में यातना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले जैसे उल्लंघन आम हैं। महिलाएं-बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित, उनके परिवार वर्षों से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं लेकिन बदले की कार्रवाई झेल रहे। शिक्षा-रोजगार बाधित होने से बलूच समाज हाशिए पर धकेला जा रहा है।
संगठन ने संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक मंचों पर स्वतंत्र जांच की मांग की। बलूचिस्तान का संकट गहराता जा रहा है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी चिंताजनक है।