
मुंबई में रिलीज होने को तैयार फिल्म ‘गोदान’ गोमाता के गहन महत्व को उजागर करने वाली एक अनोखी प्रस्तुति है। निर्देशक अमित प्रजापति द्वारा निर्मित यह फिल्म सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से गाय की महत्ता को रेखांकित करती है, खासकर पंचगव्य के चमत्कारी गुणों पर केंद्रित। कामधेनु इंटरनेशनल प्रोडक्शन के बैनर तले बनी यह फिल्म सभी धर्मों के लोगों के लिए एक संदेश लेकर आ रही है।
पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी, जो अब साध्वी बन चुकी हैं, ने इस फिल्म का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने विशेष बातचीत में कहा, ‘यह फिल्म हमारी भारतीय संस्कृति, विज्ञान और करुणा का जीवंत चित्रण है। हर भारतीय को इसे अवश्य देखना चाहिए। गाय का सम्मान केवल हिंदू ग्रंथों तक सीमित नहीं, बाइबिल और कुरान में भी उसकी पवित्रता का उल्लेख है। मैंने इन्हें स्वयं पढ़ा है।’
ममता ने स्पष्ट किया कि गौहत्या किसी भी ग्रंथ में स्वीकृत नहीं है। ‘गाय सभी धर्मों में मां के रूप में पूजनीय है।’ अपने 25 वर्षों के तप और ध्यान से समाधि प्राप्त करने वाली ममता ने रहस्योद्घाटन किया, ‘मैंने भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि का प्रशिक्षण और दर्शन प्राप्त किया है। जल्द ही ऐसा समय आएगा जब गायें दूध देना बंद कर देंगी, ठीक वैसे ही जैसे हम पानी का अपव्यय कर रहे हैं। जो अभी नहीं जागे, उनके लिए बहुत देर हो जाएगी।’
फिल्म दर्शकों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित करेगी, ममता ने कहा। उन्होंने इस्लाम में मां के महत्व और भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत का हवाला देते हुए चेतावनी दी कि मानसिक विकृति के कारण युद्ध, भुखमरी जैसी आपदाएं आ रही हैं। ‘गाय को हानि पहुंचाने से पहले दस बार सोचें। यह फिल्म एक क्रांति का सूत्रपात करेगी।’