
मुंबई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सीईओ आशीष चौहान ने भारत-यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को श्रम प्रधान उद्योगों के लिए वरदान बताया है। मंगलवार को उन्होंने कहा कि यह समझौता देश के श्रम-केंद्रित क्षेत्रों को यूरोपीय बाजारों तक आसान पहुंच प्रदान करेगा, जिससे नई नौकरियों का सृजन होगा।
दोनों पक्षों द्वारा ‘सभी ट्रेड डील्स की मां’ कहे गए इस एफटीए की हकीकत भी वैसी ही है। भारत और ईयू की संयुक्त अर्थव्यवस्थाएं विश्व जीडीपी का 25 प्रतिशत हैं, जबकि द्विपक्षीय व्यापार 220 अरब डॉलर का है—135 अरब वस्तुओं का और 85 अरब सेवाओं का।
चौहान ने कहा कि बहुपक्षीय व्यापार घटने के दौर में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से द्विपक्षीय समझौते सही दिशा हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे साझा समृद्धि का खाका बताया, जो किसानों, छोटे उद्योगों को ईयू बाजार खोलेगा, मैन्युफैक्चरिंग में अवसर बढ़ाएगा और सेवाओं में सहयोग मजबूत करेगा।
बजट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार राजस्व-व्यय के आधार पर फैसले लेगी। भाजपा शासनकाल में राजकोषीय अनुशासन चाक-चौबंद रहा है। निवेशक एलटीसीजी, एसटीटी, एसटीसीजी टैक्स में छूट की उम्मीद कर रहे हैं।
यह एफटीए भारत की युवा शक्ति को सशक्त बनाएगा, टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों में लाखों नौकरियां पैदा करेगा, आर्थिक विकास को नई गति देगा।