
नई दिल्ली में संसद के बजट सत्र से ठीक पहले मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में सर्वदलीय बैठक आयोजित हुई। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) की ओर से राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार ने इसमें हिस्सा लिया और वित्तीय, लोकतांत्रिक, सुरक्षा तथा विदेश नीति से जुड़े अहम मुद्दों पर सरकार का ध्यान केंद्रित किया।
केरल के वित्तीय संकट को प्राथमिकता देते हुए सीपीआई ने केंद्र से विशेष पैकेज की मांग की। केंद्र के उधार सीमाओं से राज्य को इस वित्तीय वर्ष में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। ऐसे असाधारण हालात में केंद्र को तत्काल हस्तक्षेप करना होगा।
विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया पर पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई। कुमार ने कहा कि यह अब ‘विशेष गहन बहिष्कार’ बन चुकी है। लोकतंत्र में जनता शासकों का चयन करती है, लेकिन यहां उलटा हो रहा है। चुनाव आयोग ‘उन्मूलन आयोग’ में बदलता जा रहा है।
आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर ऑपरेशन कगार की कटु आलोचना हुई। निर्दोष आदिवासियों को निशाना बनाने के आरोप लगे। सरकार को संसद में इसकी पूरी जानकारी और वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
विदेश नीति में भारत की कमजोरियां उजागर हुईं। ट्रंप की धमकियों, वेनेजुएला संकट या ग्रीनलैंड विवाद पर ठोस प्रतिक्रिया का अभाव स्वतंत्र नीति को क्षति पहुंचा रहा है।
आशा कार्यकर्ताओं के वेतन वृद्धि, मनरेगा की बहाली, लेबर कोड्स वापसी, बीज विधेयक विरोध तथा केंद्र योजनाओं में 75:25 हिस्सेदारी जैसी मांगें दोहराई गईं। बजट सत्र में लोकतंत्र, संघवाद और जन-आजीविका की रक्षा के लिए इन पर गहन चर्चा आवश्यक है।