
वॉशिंगटन से आई एक रिपोर्ट ने पाकिस्तान की दोहरी नीति को बेनकाब किया है। यहां राज्य की आलोचना करने वाले पत्रकारों को आतंकवाद विरोधी कानूनों का खुला दुरुपयोग कर निशाना बनाया जा रहा है। उन्हें जांच के बहाने बुलाया जाता है और जेल की हवा खिलाई जाती है।
इधर, वास्तविक आतंकी संगठन बेखौफ फंड इकट्ठा कर रहे हैं, भर्ती ले रहे हैं, कट्टरता फैला रहे हैं और जिहाद के नाम पर हिंसा, नस्ली सफाया तथा विस्तारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
पीजे मीडिया में तुर्की पत्रकार उजाय बुलुत ने लिखा कि पश्चिमी देशों द्वारा पाकिस्तान को प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी मानना दक्षिण एशिया में उनकी विदेश नीति की भ्रमित और तथ्यहीन स्थिति को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की एक एटीसी ने आठ पत्रकारों और सोशल मीडिया यूजर्स को इमरान खान समर्थन वाली ऑनलाइन गतिविधियों के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई। न्यूयॉर्क में रहने वाले एक दोषी को कोई नोटिस नहीं मिला।
विपरीत रूप से, जैश-ए-मोहम्मद के मौलाना मसूद अजहर जैसे संयुक्त राष्ट्र नामित आतंकी खुले आम जिहाद का प्रचार कर रहे हैं। पिछले नवंबर उन्होंने अपने सदस्यों को कुरान के आधार पर जिहाद में शामिल होने का आह्वान किया।
जैश, लश्कर-ए-तैयबा और उनके मुखौटे संगठनों की गतिविधियां चिंताजनक रूप से बढ़ रही हैं। देशव्यापी ट्रेनिंग, बैठकें और आयोजन भारत विरोधी नारों से गूंजते हैं, जहां कट्टरकरण को बढ़ावा मिलता है। मस्जिदों में भी ये उपदेश देते हैं।
यह रिपोर्ट पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी लड़ाई पर सवाल उठाती है, जहां असहमति को आतंक माना जाता है लेकिन वास्तविक खतरे संरक्षित हैं।