
मंगलवार को उत्तर कोरिया ने दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो जापान सागर की दिशा में गईं। इस उकसावेपूर्ण कदम पर जापान ने तीखा विरोध जताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकृष्ट किया है।
जापानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एक मिसाइल ने 80 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल की और करीब 350 किलोमीटर की दूरी तय की। प्योंगयांग के उत्तर से दोपहर 3:50 बजे छोड़ी गईं ये मिसाइलें जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र से बाहर गिरीं।
प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने अधिकारियों को पूरी जानकारी संग्रहित करने और समुद्री व हवाई यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अभी तक कोई नुकसान नहीं हुआ है।
अमेरिकी सेनाओं ने सहयोगियों की रक्षा का वादा दोहराया और कहा कि वे जागरूक हैं तथा निकट समन्वय में हैं। वर्तमान में कोई तात्कालिक खतरा नहीं है।
यह घटना दिसंबर के परीक्षणों की याद दिलाती है, जब किम जोंग-उन ने लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों का निरीक्षण किया। येलो सी में हुए इन अभ्यासों में मिसाइलें 10,000 सेकंड से अधिक उड़ीं और लक्ष्य साधा।
किम ने 8700 टन वाली परमाणु पनडुब्बी का निर्माण देखा और परमाणु शक्ति के असीम विकास का आह्वान किया। ये कदम उत्तर कोरिया की जवाबी क्षमता को मजबूत करने के इरादे को दर्शाते हैं।
क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बीच जापान मिसाइल रक्षा मजबूत कर रहा है और संयुक्त कार्रवाई की मांग कर रहा है। पूर्वी एशिया की शांति अब चुनौतीपूर्ण मोड़ पर है।