
बेंगलुरु में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य की लगभग 6,000 ग्राम पंचायत कार्यालयों का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखा जाएगा। यह फैसला कांग्रेस पार्टी का है, जो गांधीजी के ग्रामीण स्वावलंबन के सपने को अमर बनाए रखने का प्रयास है।
फ्रीडम पार्क में ‘राज भवन चलो- महात्मा गांधी मनरेगा बचाओ’ कार्यक्रम में बोलते हुए शिवकुमार ने बताया कि पार्टी नेताओं ने इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया था। उन्होंने गांधीजी के विचारों का जिक्र किया, जिसमें हर गांव में स्कूल, सहकारी समिति और पंचायत की कल्पना थी।
शिवकुमार ने मनरेगा योजना की तारीफ की, जो यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई थी। सोनिया गांधी के नेतृत्व में मनमोहन सिंह सरकार ने बेरोजगारों को रोजगार दिया। विश्व बैंक ने इसे विश्व की बेहतरीन योजनाओं में गिना। कर्नाटक में सालाना 6,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि योजना का नाम बदलना और फंडिंग पैटर्न में परिवर्तन (60% केंद्र, 40% राज्य) ने इसे कमजोर कर दिया। भाजपा शासित राज्यों में भी इसे लागू नहीं किया जा सकता। आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने भी विरोध जताया है।
अपने कनकपुरा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए शिवकुमार ने कहा कि वहां 200 करोड़ के विकास कार्य होते हैं। केंद्र की जांच अवॉर्ड में बदली। उन्होंने भाजपा नेताओं को बहस की चुनौती दी। केंद्र द्वारा फंड रोकने का आरोप लगाया।
आने वाले दिनों में तालुक स्तर पर पदयात्राएं होंगी, जिनका नेतृत्व जिला मंत्री, विधायक करेंगे। विशेष सत्र में बहस होगी। ‘हमें गांधी चाहिए, विकसित भारत ग्राम नहीं। जेल जाना पड़े तो तैयार हैं।’ यह संघर्ष मनरेगा बहाली तक चलेगा।