
प्लास्टिक प्रदूषण के बढ़ते खतरे से पूरी दुनिया की सेहत पर संकट मंडरा रहा है। अगर समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो 2040 तक इसके स्वास्थ्य प्रभाव दोगुने से अधिक हो सकते हैं। द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में छपी इस स्टडी में प्लास्टिक के पूरे चक्र—कच्चे माल निकालने से लेकर निपटान तक—के हर पड़ाव पर होने वाले नुकसान का खुलासा किया गया है।
फॉसिल ईंधन से बने 90 फीसदी प्लास्टिक का उत्पादन, उपयोग और 폐 निपटान जहरीले पदार्थ छोड़ते हैं, जो हवा, पानी और मिट्टी को दूषित करते हैं। 2016 से 2040 के बीच खपत और कचरा प्रबंधन के विभिन्न परिदृश्यों का विश्लेषण किया गया।
बिजनेस-एज-यूजुअल स्थिति में स्वास्थ्य हानि दोगुनी होगी। इसमें ग्रीनहाउस गैसों से 40 फीसदी, विनिर्माण से हवा प्रदूषण 32 फीसदी और रसायनों से 27 फीसदी योगदान रहेगा। लंदन स्कूल की मेगन डीनी के अनुसार, निर्माण और खुले में जलाने से कैंसर व अन्य बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ता है।
2016 में 21 लाख स्वस्थ जीवन वर्षों की हानि 2040 तक 45 लाख तक पहुंच सकती है, कुल 8.3 करोड़ वर्ष प्रभावित। कचरा संग्रहण व रिसाइक्लिंग सुधार अकेले पर्याप्त नहीं; सामग्री बदलाव और पुन: उपयोग जरूरी।
नीति निर्माताओं को नए प्लास्टिक उत्पादन पर नियंत्रण और अनावश्यक उपयोग रोकना होगा। यह अध्ययन वैश्विक स्वास्थ्य संकट की चेतावनी है।