
चीनी शोधकर्ताओं ने इबोला वायरस के एक महत्वपूर्ण म्यूटेशन की पहचान की है, जिसने कांगो में बड़े प्रकोप के दौरान इसके फैलाव को तेज कर दिया। सेल पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन महामारी नियंत्रण के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
2018-2020 के बीच डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में हुए इस प्रकोप ने 3,000 से ज्यादा लोगों को संक्रमित किया और 2,000 से अधिक की जान ले ली। सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कियान जुन के नेतृत्व में 480 जीनोम का विश्लेषण किया गया।
वायरल ग्लाइकोप्रोटीन में मिला जीपी-वी75ए म्यूटेशन शुरुआती चरण में उभरा और तेजी से प्रमुख हो गया। इससे मामलों में आई वृद्धि इसके उच्च संक्रमण क्षमता को दर्शाती है।
प्रयोगों से साबित हुआ कि यह म्यूटेशन कोशिकाओं और चूहों में संक्रमण बढ़ाता है। चिंताजनक रूप से, इससे कुछ एंटीबॉडी और दवाओं का असर कम हो गया, जो दवा प्रतिरोध की आशंका पैदा करता है।
प्रोफेसर जुन ने कहा कि वास्तविक समय जीनोम निगरानी आवश्यक है ताकि खतरे समय रहते पकड़े जा सकें। यह खोज भविष्य की रणनीतियों को मजबूत बनाएगी।