
पटना, 27 जनवरी। पूर्व कांग्रेस नेता शकील अहमद ने आईएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नियमित रूप से मंदिर जाने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने इसे अनसुना कर दिया। अहमद ने कहा कि चुनाव के समय ही मंदिर दर्शन तक सीमित न रखें, लेकिन बात नहीं मानी गई।
ये बयान तब आया जब अहमद ने राहुल को कायर और असुरक्षित नेता करार दिया, जिससे पार्टी में हंगामा मच गया। बिहार के तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके अहमद ने पिछले विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस छोड़ दी थी। तब से वे नेतृत्व की खुली आलोचना कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व साथियों ने बताया कि हाईकमान ने पटना व मधुबनी स्थित उनके घरों पर हमले के आदेश दिए हैं, जो विरोध प्रदर्शन के बहाने होंगे। इसके बाद पटना के फुलवारी शरीफ में उनके आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई।
अहमद ने कहा, ‘मैंने कहा था मंदिर जाना बंद न करें। चुनाव के समय जाते थे, बाद में गायब। बिहार में कहीं नजर नहीं आए।’ उन्होंने सीताराम केसरी को 20 साल बाद श्रद्धांजलि देने पर तंज कसा, जो बिहार चुनाव से ठीक पहले था। फिर लालू से गठबंधन कर ब्राह्मण नेताओं को शर्मसार करने वाले बयान दिए।
पिछड़े वर्गों को आगे बढ़ाना जरूरी है, लेकिन आगे वालों को नीचे न खींचें, अहमद ने जोर दिया। राहुल के शशि थरूर व पी चिदंबरम से एलर्जी का आरोप लगाया। वे खुद को ही हाइलाइट करना चाहते हैं।
प्रियंका व सोनिया ने योगदान दिया, राहुल तारीफ करने वालों को पसंद करते हैं। मीटिंग्स में सीनियरों को हटाकर यूथ कांग्रेस व एनएसयूआई को तरजीह। 55 पार नेताओं को साइडलाइन कर रहे हैं, जबकि खुद 56 के हो जाएंगे। इससे युवा संगठन कमजोर हुए।
अहमद ने कहा, वे सीनियरों को बुलाते हैं क्योंकि बॉस फील नहीं मिलती। यूथ दोस्तों ने घरों पर हमले की जानकारी दी। ‘पुतला जलाना मेरे धर्म को ठेस पहुंचाता है। मुसलमान हूं, दफनाना होगा।’
राहुल की राजनीति मोदी पर निर्भर। कांग्रेस दूसरा विकल्प है, लेकिन हालत खराब। मोदी असफल हों तो राहुल चमकें। पहली मुलाकात में मोदी ने उन्हें पहचान लिया, सतर्कता की मिसाल।
ये बयान कांग्रेस की आंतरिक कलह उजागर करते हैं।