
गर्भावस्था एक अनमोल यात्रा है, लेकिन सीने में जलन जैसी परेशानी इसे कष्टदायक बना देती है। हार्मोनल बदलाव और गर्भाशय के बढ़ने से एसिड रिफ्लक्स बढ़ जाता है, खासकर शुरुआती महीनों में जब जी मिचलाना भी आम होता है।
इससे निपटने के लिए थोड़ा-थोड़ा खाएं, लेकिन बार-बार। बड़े भोजन से पेट में दबाव पड़ता है, जो अम्ल को ऊपर धकेल देता है। छोटे नाश्ते आपको ऊर्जावान रखेंगे बिना जलन के।
तीखा, तला हुआ भोजन, चाय-कॉफी और खट्टे फलों से दूर रहें। गर्भावस्था में इनकी क्रेविंग होती है, लेकिन ये अम्लता को बढ़ावा देते हैं और जलन पैदा करते हैं।
खाने के बाद 2-3 घंटे तक लेटने से बचें। सीधे बैठें या खड़े रहें ताकि पाचन सुचारू हो। खूब पानी पिएं, जो अम्ल को पतला कर राहत देता है।
ढीले सूती कपड़े पहनें। टाइट ड्रेस से पेट दबता है, जलन तेज होती है। आरामदायक परिधान शरीर को स्वतंत्रता देते हैं।
केला, दही, ओट्स और नारियल पानी जैसे ठंडे आहार लें। नारियल पानी की शीतलता विशेष लाभकारी है। गंभीर स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करें।
इन सरल तरीकों से गर्भवती महिलाएं आराम पा सकती हैं और स्वस्थ रह सकती हैं।