
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को केंद्र सरकार ने मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान देने की घोषणा की है। यह खबर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। बीजेपी ने इसे ऐतिहासिक बताया है, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा असंतुष्ट है और भारत रत्न की मांग पर अड़ा हुआ है।
शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों की मिसाल है। संथाल परगना से शुरू हुए उनके आंदोलन ने जल, जंगल, जमीन की रक्षा का नारा बुलंद किया। शराबबंदी और महाजनी प्रथा के खिलाफ उनके अभियान ने लाखों आदिवासियों को जागृत किया। झारखंड राज्य गठन में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है। कठिन परिस्थितियों में तीन बार मुख्यमंत्री बनने वाले सोरेन को दिशोम गुरु कहा जाता है।
झारखंड बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, ‘यह सम्मान उनके सामाजिक-राजनीतिक योगदान की मान्यता है। आदिवासी चेतना को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने वाले इस नायक के लिए केंद्र का निर्णय सराहनीय है।’ उन्होंने सोरेन के दशकों लंबे संघर्ष को रेखांकित किया।
वहीं, जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा, ‘दिशोम गुरु का बलिदान और समाज के उत्थान में योगदान पद्म भूषण से कहीं अधिक है। झारखंड के लोग भारत रत्न की मांग कर रहे हैं, सरकार को इसे स्वीकारना चाहिए।’ पार्टी का मानना है कि यह सम्मान उनके व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं।
गणतंत्र दिवस से 앞 इस घोषणा ने आदिवासी सम्मान पर बहस छेड़ दी है। शिबू सोरेन की विरासत आज भी लाखों के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।