
भोपाल। मध्य प्रदेश की साहित्य दुनिया में कैलाश चंद्र पंत का नाम सुनते ही सम्मान का भाव जाग उठता है। इस वर्ष पद्मश्री से नवाजे जाने पर राज्य की तीन प्रमुख हस्तियों में उनका स्थान है। इस घोषणा ने साहित्यिक मंडलियों में खुशी की लहर दौड़ा दी है।
कैलाश चंद्र पंत ने केंद्र सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि यह पुरस्कार उनके व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ परिवार, मित्रों और शुभेच्छुओं के लिए भी गौरव का क्षण है।
अपने प्रारंभिक जीवन को याद करते हुए पंत ने बताया कि उन्हें एक सुसंस्कृत और विद्वतापूर्ण परिवार का आशीर्वाद मिला। हिंदी साहित्य के प्रति उनकी दीवानगी बचपन से रही। स्नातक में राजनीति विज्ञान चुनने पर उनके ईसाई प्रोफेसर ने शंकराचार्य के दर्शन से उनका परिचय कराया, जिनकी बुद्धि को उन्होंने विश्व के दार्शनिकों से श्रेष्ठ बताया।
जीवन में संघर्षों का सामना करते हुए पंत ने पत्रकारिता का सपना संजोया। प्रिंटिंग प्रेस स्थापित की, लेकिन दैनिक पत्र तो नहीं निकाल सके, साप्ताहिक की तैयारी पूरी हो गई। बाद में हिंदी भवन की जिम्मेदारी ने उन्हें अखबार बंद करने पर मजबूर किया।
मित्रों के सहयोग से उन्होंने हिंदी भवन को 13 कमरों वाला साहित्यिक केंद्र बना दिया। भाषा-सेवा से उन्हें आत्मिक शांति मिलती है।
हिंदुत्व से जुड़े पंत ने हिंदू एकता मंच की स्थापना की। ईर्ष्या से दूर रहकर कार्य के प्रति ईमानदारी पर जोर दिया। पद्मश्री को उन्होंने अपनी साहित्यिक-सामाजिक यात्रा का सम्मान बताया, जो आगे के कार्यों के लिए प्रेरणा बनेगा।