
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार द्वारा घोषित पद्म पुरस्कारों में मध्य प्रदेश के सागर जिले के 83 वर्षीय लोक कलाकार भगवानदास रैकवार का नाम चमका है। उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा जाएगा, जो उनकी अनसंग हीरोज श्रेणी में प्राचीन युद्ध शैलियों के संरक्षण के लिए है।
सागर में छत्रसाल अखाड़ा संचालित करने वाले रैकवार, जिन्हें ‘रायकवार दाऊ’ कहा जाता है, ने लाठी, तलवारबाजी और मार्शल आर्ट जैसी पारंपरिक कलाओं को जीवित रखने में जीवन समर्पित किया है। पिता और गुरु से प्राप्त ज्ञान को उन्होंने मध्य प्रदेश से लेकर छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हिमाचल तक फैलाया।
बैंक नौकरी के साथ-साथ 60 वर्षों से प्रशिक्षण देते आ रहे रैकवार का मानना है कि ये कलाएं शारीरिक शक्ति के साथ अनुशासन और संस्कार सिखाती हैं। उन्होंने प्रशासन से कई बार संरक्षण की मांग की। सम्मान पर उन्होंने कहा, ‘यह स्वर्ग प्राप्ति जैसा है।’
सागर में खुशी की लहर दौड़ गई है। परिवार और शिष्य इसे अखाड़ा संस्कृति की बड़ी जीत मान रहे हैं। यह पुरस्कार नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का संदेश देता है।