
नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में मिस्र के राजदूत ने घोषणा की कि उनका देश आने वाले वर्षों में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को दो अरब डॉलर से बढ़ाकर 12 अरब डॉलर करने की योजना बना रहा है। यह महत्वाकांक्षी लक्ष्य दोनों देशों के मजबूत आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
फॉरेन कॉरस्पॉडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में बोलते हुए कामेल जायद गलाल ने ऊर्जा, विनिर्माण, कृषि और कनेक्टिविटी क्षेत्रों में सहयोग के व्यापक अवसरों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मिस्र में भारतीय निवेश वर्तमान में 3.7 अरब डॉलर है, जो जल्द ही 10 अरब डॉलर को पार कर जाएगा।
राजदूत ने भारतीय कंपनियों से अपील की कि वे मिस्र को दीर्घकालिक साझेदार के रूप में अपनाएं। ऊर्जा क्षेत्र में सौर एवं पवन ऊर्जा के संसाधनों के साथ-साथ स्वेज नहर की रणनीतिक स्थिति मिस्र को हरित ऊर्जा का वैश्विक केंद्र बना सकती है।
कृषि, उर्वरक और औद्योगिक उत्पादन में भी मजबूत साझेदारी की संभावना है। मिस्र के औद्योगिक क्षेत्र तथा अफ्रीका व यूरोप के साथ मुक्त व्यापार समझौते भारतीय उद्योगों के लिए बड़े बाजार खोलते हैं। लाल सागर एवं भूमध्य सागर के बंदरगाह वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण द्वार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी एवं राष्ट्रपति अल-सिसी की बैठकों के बाद 2023 में संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला। अब फोकस वास्तविक आर्थिक उपलब्धियों पर है। मिस्र की विदेश नीति रणनीतिक स्वतंत्रता एवं संप्रभुता पर आधारित है, जो भारत के दृष्टिकोण से मेल खाती है।