
खाने के बाद भी थकान, कमजोरी और शरीर दर्द आम शिकायतें बन गई हैं। ये लक्षण बताते हैं कि शरीर में प्रोटीन की कमी है और हार्मोन असंतुलित हैं। भारतीय भोजन फाइबर से भरपूर होता है, लेकिन प्रोटीन का अभाव रहता है। ऐसे में काला चना एक बेहतरीन विकल्प है, जो रसोई में आसानी से उपलब्ध होता है।
इसमें प्रोटीन, आयरन और मैंगनीज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं और सहनशक्ति बढ़ाते हैं। एनीमिया के मरीजों के लिए भी ये वरदान है, क्योंकि ये रक्त की शुद्धता और मात्रा दोनों बढ़ाता है। कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स के कारण डायबिटीज रोगी बेखौफ होकर खा सकते हैं।
आयुर्वेद में काले चने को मांसधातु वर्धक और बल्य माना गया है। ये भारी नहीं, बल्कि पाचन को मजबूत करने वाला आहार है। सही तरीके से भिगोकर और उबालकर खाने से गट हेल्थ बेहतर होती है।
उपयोग का तरीका सरल है: रातभर एक कटोरी चना भिगोएं, सुबह उबालें और हींग-जीरे के तड़के के साथ परोसें। कच्चा न खाएं, वरना गैस-कब्ज की समस्या हो सकती है। नियमित सेवन से ऊर्जा स्थिर और शरीर बलशाली बनेगा।