
पटना। बिहार की सियासत में रविवार को बड़ा राजनीतिक हलचल मच गई जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने तेजस्वी यादव को अपना कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। नियुक्ति के ठीक बाद तेजस्वी ने अपने पिता व दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, जो इस क्षण को और भी भावुक बना गया।
यह फैसला पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत बनाने, राजनीतिक चुनौतियों से निपटने और भविष्य की रणनीति को सशक्त करने के मकसद से लिया गया माना जा रहा है। बिहार में युवा नेता के रूप में प्रसिद्ध तेजस्वी विपक्ष के प्रमुख चेहरे के तौर पर भी जानी जाते हैं। इस घोषणा से कार्यकर्ताओं में जोश भर आया है और वरिष्ठ नेता इसे दल के उत्थान का संकेत बता रहे हैं।
राजद ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसे ‘नए युग की शुरुआत’ करार दिया। नेताओं का मानना है कि तेजस्वी के नेतृत्व में पार्टी का कद और बढ़ेगा तथा बिहार की राजनीति में इसकी भूमिका मजबूत होगी।
लेकिन खुशी का यह माहौल परिवार के अंदर ही ठंडा पड़ गया जब लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने तंज कसते हुए एक्स पर लिखा कि यह ‘पुरुष शिखर की पारी का पटाक्षेप’ है और ‘घुसपैठ गिरोह’ के हाथों ‘कठपुतली शहजादा’ की ताजपोशी हो गई। रोहिणी ने पहले भी पार्टी की आंतरिक स्थिति पर सवाल उठाए थे, आरोप लगाया था कि घुसपैठिए लालू की विरासत को तबाह कर रहे हैं।
यह पारिवारिक कलह राजद के लिए नई चुनौती पैदा कर सकती है। तेजस्वी को न केवल बाहरी दुश्मनों से लडना होगा बल्कि घरेलू मतभेदों को भी सुलझाना होगा। बिहार विधानसभा चुनावों से पहले यह घटनाक्रम सियासी समीकरण बदलने वाला साबित हो सकता है।