
पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं, लेकिन जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) ने इसे मौका बनाकर जोरदार कटाक्ष किया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने चेतावनी दी कि तेजस्वी की दोहरी जिम्मेदारी राजद के लिए घातक साबित हो सकती है और पार्टी का पूरा बंटाधार कर सकती है।
मीडिया से बातचीत में प्रसाद ने कहा कि तेजस्वी की बढ़ती जिम्मेदारियों से राजद जमीनी स्तर पर बुरी तरह कमजोर पड़ चुकी है। ‘नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उनकी गैर-जिम्मेदारी जगजाहिर है। अब कार्यकारी अध्यक्ष बनने की बात हो रही है तो सवाल यह है कि इससे पार्टी का क्या होगा? सर्वनाश तो निश्चित है।’
कर्पूरी ठाकुर के नाम का सहारा लेने पर भी प्रसाद ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि महान नेता रातोंरात नहीं बनते। कर्पूरी ठाकुर ने वर्षों की मेहनत, संघर्ष और साहसिक फैसलों से यह मुकाम हासिल किया। लालू प्रसाद को भी जेपी आंदोलन की देन बताया, लेकिन तेजस्वी के दावों को खोखला करार दिया।
प्रसाद ने राजद के आंतरिक कलह पर भी रोशनी डाली। रोहिणी आचार्य के पोस्ट से लेकर वीरेंद्र समेत नेताओं के बयानों तक, कार्यकर्ताओं में तेजस्वी के रवैये से असंतोष साफ दिख रहा है। ऐसे पुराने बयान डूबती नाव को नहीं बचा सकते।
कांग्रेस के नसीमउद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे पर भी टिप्पणी करते हुए प्रसाद ने राहुल गांधी की कप्तानी में पार्टी की दुर्दशा का जिक्र किया। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का सफाया हो रहा है और असली कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट रहा है। देशभर से आ रही आलोचनाओं के बाद आत्मचिंतन जरूरी है।
बिहार की राजनीति में यह तलवारबाजी दोनों दलों के बीच जंग को और भड़का सकती है। आने वाले दिनों में और तीखे हमले देखने को मिल सकते हैं।