
भारत में हर साल पेश होने वाले आम बजट से पहले प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों की समझ जरूरी हो जाती है। ये दोनों कर सरकारी आय के मुख्य स्रोत हैं, जो महंगाई को नियंत्रित करने, बाजार को प्रभावित करने और आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालते हैं। बजट 2026 की तैयारी में ये जानकारियां आपकी मदद करेंगी कि घोषणाओं का असर कैसे पड़ेगा।
प्रत्यक्ष कर वे हैं जो व्यक्ति या कंपनी अपनी आय पर सीधे सरकार को अदा करते हैं। इनका बोझ किसी तीसरे पर नहीं डाला जा सकता। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) इनकी वसूली संभालता है। इनकम टैक्स सैलरी, बिजनेस आय या किराए पर लगता है। कॉर्पोरेट टैक्स कंपनियों के लाभ पर वसूला जाता है। पूंजीगत लाभ कर शेयर, संपत्ति बिक्री से मुनाफे पर लगाया जाता है। शेयर बाजार लेन-देन पर एसटीटी भी प्रत्यक्ष कर का हिस्सा है।
ये कर प्रगतिशील होते हैं, यानी ज्यादा कमाई पर ज्यादा टैक्स, जो सामाजिक समानता बनाए रखने में मदद करता है। हाल के सुधारों से नया टैक्स रिजीम सरल बना है।
अप्रत्यक्ष कर खरीदारी में छिपे होते हैं। सामान या सेवा खरीदने पर दुकानदार इन्हें वसूलकर सरकार को देता है। जीएसटी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो वैट, सर्विस टैक्स जैसों को एकीकृत कर चुका है। आयात पर कस्टम ड्यूटी, पेट्रोल-डीजल जैसी चीजों पर सेस लगता है।
सरकारी राजस्व का आधा से ज्यादा हिस्सा अप्रत्यक्ष करों से आता है। बजट में इनमें बदलाव से वस्तुओं की कीमतें तुरंत बदल जाती हैं। मोबाइल सस्ता हो या दवा महंगी, महंगाई दर पर असर पड़ता है। बाजार का रुख भी बदल जाता है।
विशेषज्ञ कहते हैं कि अप्रत्यक्ष कर गरीब-अमीर पर समान पड़ते हैं, इसलिए जरूरी वस्तुओं पर छूट और लग्जरी पर ज्यादा टैक्स की बहस बजट में छिड़ती है। देसी उद्योग बचाने को कस्टम बढ़ाना या घटाना भी मुद्दा बनता है।
बजट 2026 में ये फैसले विकास, रोजगार और उपभोग को दिशा देंगे। इन करों को समझकर आप बजट की गहराई में उतर सकेंगे।