
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब खानपान, प्रदूषण, मौसमी बदलाव और तनाव सेहत को चुपचाप खोखला कर रहे हैं। लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान एक सहज उपाय सुझाते हैं – पैदल चलना। यह आसान आदत मांसपेशियों-हड्डियों को मजबूत बनाती है, दिल की सेहत सुधारती है और जीवनकाल बढ़ाती है।
आयुर्वेद के मतानुसार, चलना प्राण ऊर्जा संतुलित करता है, पाचन दुरुस्त रखता है और मानसिक बोझ हल्का करता है। वैज्ञानिक अध्ययन पुष्टि करते हैं कि नियमित वॉकिंग हार्ट अटैक व स्ट्रोक के जोखिम को काफी घटा देती है।
हर उम्र के लिए बेस्ट व्यायाम। पैदल चलते ही हृदय गति तेज होती है, रक्त प्रवाह बेहतर होता है, शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। ब्लड प्रेशर काबू में, खराब कोलेस्ट्रॉल घटता है, वजन संतुलित रहता है। दिमागी सुकून के लिए एंडोर्फिन्स रिलीज होते हैं जो चिंता भगाते हैं।
तेज चाल प्राणवायु जागृत कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है। हृदय रोग बचाव के लिए विशेषज्ञ 30 मिनट रोज सलाह देते हैं। अमेरिकी हार्ट फाउंडेशन व नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन के रिसर्च के मुताबिक 9,000-10,000 कदम हफ्ते में 5 दिन दिल के लिए परफेक्ट।
शुरुआत 3,800-4,000 कदम से करें, नियमितता जरूरी। 60+ उम्र वालों के लिए 6,000-9,000 कदम चलना 2,000 कदम वालों से 40-50% ज्यादा सुरक्षित। 2.5-4 मील की दूरी हृदय को ताकतवर बनाती है।
आयुर्वेद भी कहता है, संतुलित चलना शरीर की ज्वाला बनाए रखता है। रोज कदम गिनें, स्वस्थ जीवन पाएं।