
पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक हिंदू किसान की निर्मम हत्या ने धार्मिक अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति को फिर से सामने ला दिया है। कोल्ही समुदाय के इस किसान का एक प्रभावशाली जमींदार से जमीन विवाद था, जिसके बाद उसे दिनदहाड़े गोली मार दी गई। इस घटना पर हिंदू समुदायों ने हाईवे जाम कर न्याय की मांग की।
खबरहब की रिपोर्ट के अनुसार, सिंध में ऐसी हिंसा एक निश्चित पैटर्न पर चलती है। ईशनिंदा का आरोप लगते ही धार्मिक नेता भीड़ इकट्ठा करते हैं, सांप्रदायिक दंगे भड़कते हैं और हिंदू परिवारों को जबरन उजाड़ दिया जाता है। यह हत्या सामंती ताकत, सजा से छूट और धार्मिक भेदभाव की गहरी समस्या को रेखांकित करती है।
पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए झूठे मुकदमे, अपहरण, जबरन धर्मांतरण और लक्षित हमले आम हो गए हैं। लाहौर के सेंटर फॉर सोशल जस्टिस की स्टडी बताती है कि 2021-2024 के बीच 421 अल्पसंख्यक लड़कियों-महिलाओं का जबरन इस्लाम कबूल कराया गया, जिनमें 71 प्रतिशत नाबालिग थीं, ज्यादातर हिंदू-ईसाई।
कानूनी लड़ाई में परिवारों को धमकियां, देरी और पक्षपाती फैसले मिलते हैं। जबरन धर्मांतरण को रोकने वाला कोई सख्त कानून नहीं है, जिससे अपराधी बेखौफ हैं। सरकारी उदासीनता और कट्टर संगठनों की बढ़ती स्वीकार्यता ने हिंदुओं का संघर्ष जीवित रहने का बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप जरूरी है ताकि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों की रक्षा के लिए कदम उठाए।