
25 जनवरी को हिमाचल प्रदेश अपना स्थापना दिवस धूमधाम से मनाता है। यह दिन न केवल 1971 में पूर्ण राज्यत्व प्राप्ति की याद दिलाता है, बल्कि बिखरी रियासतों से एकजुट प्रदेश बनने की प्रेरक कहानी को जीवंत करता है। आजादी के बाद के संघर्ष से लेकर आज की आर्थिक ऊंचाइयों तक, हिमाचल की यात्रा प्रेरणा का स्रोत है।
1948 में पहली बार अस्तित्व में आया यह क्षेत्र 30 छोटी-बड़ी रियासतों का संगम था। 1950 में संविधान लागू होने पर ‘ग’ श्रेणी का दर्जा मिला। बिलासपुर का विलय 1954 में, केंद्रशासित प्रदेश का रूप 1956 में और 1966 में पंजाब के पहाड़ी इलाकों का समावेश हुआ। दिसंबर 1970 के राज्य अधिनियम ने 25 जनवरी 1971 को इसे भारत का 18वां राज्य बना दिया।
राज्यत्व के बाद विकास की गति तेज हुई। दुर्गम भूगोल और आपदाओं के बावजूद सड़कें, स्कूल, अस्पताल, जलविद्युत और उद्योग स्थापित हुए। 2024-25 में जीएसडीपी 2.27 लाख करोड़ पहुंची। 2025 (अगस्त तक) निर्यात 223.20 मिलियन डॉलर, जिसमें फार्मा व ऑर्गेनिक का 69.5% योगदान। अब हिमाचल पर्यटन से आगे pharma हब बन रहा है।
नदियां, बर्फीले शिखर और मेहनती लोग इसकी पूंजी हैं। सेब बागान, जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण—ये अर्थव्यवस्था की रीढ़। स्थापना दिवस संदेश देता है: इरादे पक्के हों तो पहाड़ भी राह बना लेते हैं। भविष्य उज्ज्वल प्रयासों से ही गढ़ा जाएगा।