
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में भारत ने ईरान का खुला समर्थन कर वैश्विक मंच पर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बयां किया। पश्चिमी देशों द्वारा ईरान के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव का भारत ने विरोध किया, जिस पर ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने शनिवार को गहरी कृतज्ञता जताई।
ईरान में 28 दिसंबर से भड़के प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई की निंदा करने वाले इस प्रस्ताव को फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन जैसे देशों ने पेश किया था। भारत समेत ग्लोबल साउथ के कई राष्ट्रों ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए ‘नो’ में वोट दिया। मतगणना में 25 पक्ष में, 7 विपक्ष में और 14 तटस्थ रहे।
फथाली ने एक्स पर लिखा, ‘भारत सरकार के सैद्धांतिक समर्थन के लिए हृदय से आभार। यह प्रस्ताव असत्यापित और राजनीतिक है। भारत का रुख राष्ट्रीय संप्रभुता और बहुपक्षवाद की मिसाल है।’
भारत का यह कदम दो अहम संदेश देता है। पहला, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप अस्वीकार्य। दूसरा, पश्चिमी दबाव में झुकाव नहीं। अमेरिकी टैरिफ धमकियों के दौर में यह स्वायत्तता का प्रतीक है।
चीन और पाकिस्तान के साथ एकजुटता ने भौंहें चढ़ाईं, लेकिन यह मुद्देपरक कूटनीति है। भारत-ईरान संबंध मजबूत होंगे, चाहे चाबहार बंदरगाह हो या ऊर्जा सुरक्षा।
यह घटना वैश्विक राजनीति में बदलाव का सूचक है। भारत उभरते बहुध्रुवीय विश्व का स्तंभ बन रहा है।