
अमेरिका और ग्रीनलैंड को लेकर छिड़े विवाद ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस महत्वाकांक्षी योजना से बाजारों में उतार-चढ़ाव लंबे समय तक जारी रह सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में बताया गया है कि निवेशक इस सौदे से जुड़ी अतिरिक्त जानकारियों का इंतजार कर रहे हैं। इन जानकारियों से तय होगा कि अमेरिका-डेनमार्क के बीच वार्ता सुगम होगी या बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया है, लेकिन तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों के भंडार इसकी असली आकर्षण हैं। यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ की धमकी ने हालात बिगाड़ दिए, जिसके जवाब में फ्रांस, जर्मनी व स्वीडन ने सैन्य बल बढ़ा दिया।
1 फरवरी 2026 से आठ यूरोपीय देशों के सामान पर टैक्स लगाने का ऐलान हुआ, जो जून तक 25 प्रतिशत हो जाता। दावोस में ट्रंप का पीछे हटना राहत की बात है, लेकिन अमेरिकी सेना की तैनाती, संसाधन उपयोग और संप्रभुता जैसे सवाल अनुत्तरित हैं।
अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता के अनुसार, ये मुद्दे 1951 के सुरक्षा समझौते का नया रूप ले सकते हैं। बाजार अस्थिरता तब तक बनी रहेगी, जब तक स्पष्टता न मिले। निवेशक इस भू-राजनीतिक तनाव के बीच सावधानी बरत रहे हैं।