
स्विट्जरलैंड के दावोस में 19 से 23 जनवरी तक चली विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की 56वीं वार्षिक बैठक ने वैश्विक नेताओं को एक मंच पर लाकर दुनिया के ज्वलंत मुद्दों पर गहन विमर्श का अवसर प्रदान किया। 130 देशों से लगभग 3,000 प्रतिनिधियों ने शिरकत की, जिसमें 65 राष्ट्राध्यक्ष, जी-7 के प्रमुख नेता, 830 से अधिक बड़ी कंपनियों के सीईओ और 80 तकनीकी दिग्गज शामिल थे।
डब्ल्यूईएफ के अध्यक्ष बोर्गे ब्रेंडे ने कहा कि अनिश्चितता के इस दौर में अवसर भी कम नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीछे हटने का समय नहीं, बल्कि एकजुट होकर प्रगति करने का है। मंच का लक्ष्य संकटों पर प्रतिक्रिया मात्र नहीं, बल्कि भविष्य की नींव रखना है।
अमेरिका-चीन व्यापार समझौते के वैश्विक प्रभावों पर विशेषज्ञों ने चर्चा की। गाजा और वेस्ट बैंक में आर्थिक चुनौतियों के बीच वित्तीय स्थिरता के उपाय सुझाए गए। धार्मिक नेताओं ने धर्मों के संवाद से शांति स्थापना पर बल दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभूतपूर्व अवसरों का जिक्र किया, जबकि यूरोपीय आयोग की उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मित्रों और विरोधियों दोनों से संवाद की वकालत की। मुख्य अर्थशास्त्रियों की रिपोर्ट ने अर्थव्यवस्था की मजबूती के साथ-साथ संपत्ति मूल्य, कर्ज और एआई की अनिश्चितताओं को रेखांकित किया।
आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने एआई को श्रम बाजार पर सुनामी बताया। एनवीडिया के जेंसन हुआंग ने विकासशील देशों से एआई अपनाने की अपील की। नोबेल विजेताओं ने व्यापारिक तनावों से वैश्विक व्यवस्था को खतरे की चेतावनी दी।
यह बैठक सहयोग की महत्ता को रेखांकित करती हुई समाप्त हुई, जो वैश्विक प्रगति की कुंजी है।