
2026 की शुरुआत से भारतीय शेयर बाजारों में 4 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने जनवरी से अब तक करीब 36,500 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले हैं, जिससे बाजार पर भारी दबाव पड़ा है।
इस सप्ताह निफ्टी में 2.51 प्रतिशत की कमी आई और यह 25,048 पर बंद हुआ। सेंसेक्स अंतिम दिन 769 अंकों की गिरावट के साथ 81,537 पर समाप्त हुआ, जो हफ्ते भर में 2.43 प्रतिशत नीचे रहा।
सभी सेक्टर लाल निशान में रहे। रियल्टी में 11.33 प्रतिशत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, टेलीकॉम व डिस्क्रेशनरी में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। मिडकैप 100 में 4.58 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 में 5.81 प्रतिशत की कमी आई। बैंक निफ्टी 58,800 के नीचे फिसल गया।
मुनाफावसूली से शुरू हुई गिरावट को एफपीआई बिकवाली और अमेरिकी टैरिफ नीतियों की चिंताओं ने बढ़ावा दिया। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ग्रीनलैंड व टैरिफ पर अमेरिकी बयानों ने बाजारों को हिलाया। बॉन्ड यील्ड बढ़ने और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की समीक्षा ने निवेशकों को सतर्क कर दिया।
कुछ आईटी-बैंकिंग कंपनियों के अच्छे नतीजों से शुरुआती राहत मिली, लेकिन अन्य कमजोर परिणामों ने मनोबल तोड़ा। रुपया 92 रुपये प्रति डॉलर के करीब कमजोर हुआ, महंगाई की आशंका बढ़ी।
निवेशक केंद्रीय बजट 2026 और फेड रिजर्व के फैसलों पर नजर रखे हैं। बजट से पहले शॉर्ट पोजीशन कवरिंग से उछाल संभव, लेकिन स्थायी रिकवरी वैश्विक सुधार, बेहतर नतीजों और बजट पर निर्भर।