
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने देशभर में धार्मिक आयोजनों में राजनेताओं के बढ़ते हस्तक्षेप पर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि उत्तर प्रदेश से लेकर अन्य राज्यों तक धार्मिक पर्वों, पूजा-अर्चना और स्नान जैसे कार्यक्रमों में राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जो लगातार नए विवादों और तनाव को जन्म दे रहा है।
मायावती ने कहा कि संकीर्ण स्वार्थों के लिए धर्म और राजनीति का मिश्रण खतरनाक है। प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी को पुलिस ने रोका और पैदल चलने को कहा। इससे शिष्यों के साथ धक्कामुक्की हुई। नाराज शंकराचार्य ने अपने शिविर के बाहर धरना दिया।
प्रशासन ने 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए—एक उनकी पदवी पर सवाल, दूसरा विवाद पर स्पष्टीकरण। मेला प्रतिबंध की चेतावनी दी गई। शंकराचार्य ने जवाब भेजे, लेकिन अब राजनीतिक दल इस मामले में कूद पड़े हैं।
मायावती ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की अपील की। संविधान धर्म को राजनीति से अलग रखने का आदेश देता है, ताकि राजनेता निष्पक्ष होकर सबका हित साधें। उत्तर प्रदेश दिवस पर सभी को बधाई देते हुए उन्होंने जनता की यही अपेक्षा बताई। यह प्रवचन समाज में शांति बनाए रखने के लिए जरूरी है।