
झारखंड की राजधानी रांची में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने जनजातीय संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह आयोजन जनजातीय समुदायों के कल्याण और राष्ट्रीय एकता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे मुद्दों पर गहन बातचीत हुई। भागवत जी ने विविधता में एकता के महत्व पर बल दिया और जनजातीय भाइयों को मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता बताई। स्थानीय नेता इस मंच की सराहना कर रहे हैं।
झारखंड की समृद्ध जनजातीय विरासत इस संवाद के लिए आदर्श पृष्ठभूमि प्रदान करती है। चर्चाओं में भूमि अधिकार, आर्थिक असमानता और पर्यावरण संरक्षण प्रमुख रहे। आरएसएस का पूर्वी भारत में विस्तार इस कार्यक्रम से और मजबूत होगा।
जनजातीय प्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने आयोजन को व्यापक बनाया। सतत विकास मॉडल और कौशल विकास योजनाओं पर सहमति बनी। यह पहल स्वैच्छिक संगठनों की भूमिका को रेखांकित करती है।
भविष्य में इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित होंगे, जो जमीनी स्तर पर बदलाव लाएंगे। मोहन भागवत का यह रांची दौरा समावेशी राष्ट्रवाद की मिसाल है। अपडेट्स के लिए बने रहें।