
टी20 क्रिकेट के इस दौर में जब सब कुछ फटाफट हो रहा है, चेतेश्वर पुजारा ने टेस्ट क्रिकेट की धीमी लेकिन मजबूत लय को अपनाया और भारत के लिए एक दीवार की तरह खड़े हो गए। राजकोट में 25 जनवरी 1988 को जन्मे पुजारा के क्रिकेट सफर में उनके पिता अरविंद का योगदान सर्वोपरि रहा, जो खुद प्रथम श्रेणी क्रिकेटर और कोच थे।
सौराष्ट्र के लिए 2005 में घरेलू क्रिकेट में कदम रखने वाले पुजारा ने 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया। द्रविड़ और लक्ष्मण जैसे दिग्गजों के करियर के अंतिम पड़ाव पर पुजारा ने अपनी जगह पक्की की। उनकी क्रीज पर लंबे समय तक टिकने की कला ने उन्हें ‘द वॉल’ का खिताब दिलाया।
2010 से 2023 तक पुजारा ने भारत की टेस्ट सफलताओं में अहम भूमिका निभाई। 2018-19 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 521 रनों की पारी ने इतिहास रचा। अहमदाबाद में इंग्लैंड के खिलाफ 206, जोहानसबर्ग में 153, रांची में 202 रनों की यादगार पारियां उनके करियर की शान हैं।
103 टेस्ट में 7195 रन, औसत 43.60, 19 शतक और 35 अर्धशतक—ये आंकड़े उनकी महानता बयां करते हैं। काउंटी क्रिकेट में भी सफलता हासिल की। 24 अगस्त 2025 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले पुजारा टेस्ट फॉर्मेट के प्रतीक बन गए।