
शिक्षा समाज का आधार स्तंभ है जो आने वाली पीढ़ियों को मजबूत बनाती है। अंतरराष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर बॉलीवुड की उन फिल्मों पर नजर डालते हैं जो शिक्षा के महत्व को गहराई से उकेरती हैं। ये सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि जागृति का माध्यम हैं।
‘तारे जमीन पर’ डिस्लेक्सिया से जूझते बच्चे ईशान की मार्मिक कहानी है। आमिर खान द्वारा निर्देशित यह फिल्म रटंत शिक्षा पर सवाल उठाती है और व्यक्तिगत ध्यान की जरूरत बताती है।
‘नील बट्टे सन्नाटा’ में स्वरा भास्कर एक मजदूर मां की भूमिका में हैं, जो बेटी को प्रेरित करने खुद कक्षा में बैठती हैं। यह हास्य-व्यंग्य से भरपूर फिल्म गरीबी के बावजूद महत्वाकांक्षा की मिसाल है।
शबाना आजमी और जूही चावला की ‘चॉक एंड डस्टर’ शिक्षकों के समर्पण को दर्शाती है। वे छात्रों की हर समस्या का समाधान निकालती हैं, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ती हैं।
‘पाठशाला’ में शाहिद कपूर शिक्षा के व्यापारीकरण पर करारा प्रहार करते हैं। निजी स्कूलों की मनमानी और छात्रों के हितों की अनदेखी को बेनकाब करती यह फिल्म विचारोत्तेजक है।
‘आई एम कलाम’ एक गरीब बालक की प्रेरणादायक यात्रा है, जो डॉ. कलाम से प्रेरित हो शिक्षा ग्रहण करता है। ‘थ्री इडियट्स’, ’12वीं फेल’ जैसी अन्य फिल्में भी शिक्षा क्रांति का संदेश देती हैं। ये कृतियां हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि शिक्षा कैसे बदलाव ला सकती है।