
पंजाब के लुधियाना जिले के समराला में शुक्रवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महान संत सतगुरु राम सिंह महाराज की जयंती के अवसर पर एक भव्य स्मृति समारोह में शिरकत की। उन्होंने सतगुरु की शिक्षाओं को सामाजिक क्रांति और राष्ट्र जागरण का अमूल्य दर्पण बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सतगुरु का जीवन मानवीय मूल्यों, नैतिकता और राष्ट्रीय कल्याण पर आधारित आदर्श विकास का प्रतीक है। उन्होंने कूका आंदोलन में प्राण न्यौछावर करने वाले नामधारी सिख शहीदों को पुष्प अर्पित कर याद किया।
आयोजकों की मांग पर सैनी ने हरियाणा सरकार द्वारा सतगुरु राम सिंह के नाम पर पीठ स्थापना के लिए ठोस कदम उठाने का ऐलान किया। यह घोषणा सतगुरु के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
सतगुरु राम सिंह दूरदर्शी संत थे जिन्होंने भक्ति को कर्मठता, धर्म को सुधार और आध्यात्म को राष्ट्रसेवा से जोड़ा। ब्रिटिश काल में जब समाज कुविचारों से ग्रस्त था, तब नामधारी आंदोलन के जरिए उन्होंने आत्मसम्मान और अनुशासन की नींव रखी।
कूका आंदोलन ने 1849 के बाद ब्रिटिश राज के खिलाफ शांतिपूर्ण विद्रोह का सूत्रपात किया। असहयोग, स्वदेशी, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, पंचायती राज और आत्मनिर्भरता का प्रचार सतगुरु का योगदान था।
ब्रिटिशों ने आंदोलन को कुचलने के लिए बाबा राम सिंह को रंगून भेजा, लेकिन विचार अटल रहे। 1872 में 65 नामधारियों को तोपों से उड़ाया गया, फिर भी संघर्ष 1947 तक चला।
नेताजी बोस ने नामधारियों के बलिदान की सराहना की। पीएम मोदी ने 2014 में स्मारक डाक टिकट जारी कर सम्मान दिया। आज आत्मनिर्भर भारत का नारा सतगुरु से प्रेरित है।
सतगुरु का संदेश आने वाली पीढ़ियों को नैतिकता और देशभक्ति की राह दिखाता रहेगा।